कुमार नरोत्तम / नई दिल्ली September 14, 2008
रविवार को दिल्ली के आईटीओ चौराहे पर लगा एक सरकारी विज्ञापन हर राहगीर को मुंह चिढ़ा रहा था। विज्ञापन में बड़े अक्षरों में लिखा है कि 'चारों तरफ जगमगा रही है दिल्ली।'
जी तो हमारा भी यही चाह रहा था कि लिख दें कि बम धमाकों से बेफिक्र रही दिल्ली। लेकिन हकीकत यह है कि लोग फिर से उठ खड़े तो हुए हैं, हिम्मत की भी र्कोई कमी नहीं है। चारो तरफ दूसरों की मदद का जोरदार जज्बा दिखा है, लेकिन शहर में हर शख्स डरा सहमा सा है।
दिल्ली के रीगल सिनेमा के पास रविवार दोपहर तक लोगों की आवाजाही काफी कम रही। अधिकतर दुकानें बंद थी। रीगल के बगल में श्रीलेदर्स का शोरूम खुला है। लेकिन इक्के दुक्के लोग खरीदारी के लिए दुकान में आ रहे हैं।
श्रीलेदर्स के कनॉट प्लेस के शोरूम के मैनेजर शांतनु ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि आम रविवार की तुलना में इस बार सिर्फ 10 फीसदी लोग खरीदारी के लिए आ रहे हैं। रीगल के बाहर पान-मसाला की रेहड़ी लगाने वाला शिव नारायण तिवारी की दुकान उस कूड़ेदान के बगल में है, जहां शनिवार को जिंदा बम मिला था।
उस वक्त के माहौल का जिक्र करते हुए वह बताता है, चारों तरफ लोगों का हूजूम उमड़ पड़ा था। सभी लोग सेंट्रल पार्क में मदद के लिए भागे जा रहे थे। यहां पर तो सारी दुकानें उस वक्त खाली करा दी गई थी और उस जिंदा बम को डिफ्यूज करने वाली मशीन यहां लगा दी गई थी।
जनपथ बाजार
रविवार को जनपथ बाजार पर भी सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां पर आम रविवार को सैकड़ों दुकानें लगती है। कपड़े आदि के सामान रविवार को खरीदने बड़ी संख्या में लोग आते हैं। लेकिन इस रविवार को हालत बिल्कुल विपरीत है।
जनपथ बाजार में रेहड़ी लगाकर कपड़े बेचने वाला राजेश सिंह ने कहा कि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली पुलिस ने सतर्कता के तौर पर आज बाजार बंद रखने को कहा है। राजेश सिंह बताते हैं कि यहां पर दुकान का किराया 2500 से 3000 रुपये प्रति दिन है और रविवार को दुकान बंद रहने की वजह से व्यापारियों को औसतन 50 से 60 हजार का घाटा हो रहा है।
जनपथ बाजार के बाहर पुलिस बूथ पर काफी संख्या में पुलिस गश्त लगा रहे थे। पुलिस यह मानने को कतई तैयार नही हुए कि शनिवार के हादसे का लोगों पर कोई असर है। लेकिन पुलिस की यह बात तब खोखली साबित हुई, जब जनपथ बाजार के बाहर एक महिला आर के पुरम जाने के लिए ऑटो की तलाश कर रही थी और उसे ऑटो रिक्शा नजर नहीं आ रहा था।
करोल बाग और गफ्फार मार्केट का हाल
करोल बाग में बाबा रामदेव चौक पर (जिसके बगल में धमाका हुआ) अन्य दिनों की तरह रविवार को भी जाम लगा हुआ है। दरअसल घटना स्थल के दोनों तरफ पुलिस ने बैरिकेटिंग कर दिया है और लोगों को आने जाने में काफी परेशानी हो रही है।
इलेक्ट्रॉनिक मार्केट और गफ्फार मार्केट दोनों खुले हुए हैं, लेकिन लोगों की संख्या काफी कम है। एक दुकानदार ने बताया कि आज धंधा पूरी तरह से मंदा है। 10 फीसदी लोग भी नही आ रहे हैं। बाजार की मुख्य सड़क पर गणेश चतुर्थी की विसर्जन यात्रा भी धूमधाम से निकल रही थी।
काफी संख्या में लोग इसमें शामिल थे। यात्रा के संयोजक अनिल का कहना है कि शनिवार का हादसा तो हमने प्रत्यक्ष तौर पर देखा है। लेकिन दिल्ली कभी थमती नही है। आज से हमलोग अपने अपने काम में लग गए हैं।
सरोजिनी नगर
सरोजिनी बाजार की हालत सामान्य है। दोपहर बाद यहां लोगों की संख्या में इजाफा होता गया। यह बाजार भी कभी इन हादसों का गवाह रहा था। आम रविवार की तुलना में बाजार में चहलकदमी कम है। कैपिटल इंपोरियम के मैनेजर रवि बत्रा का कहना है कि धमाके का असर आम लोगों पर है। वे बाहर नही निकल रहे हैं। उन्होंने अगले 1 सप्ताह के भीतर बाजार में फिर से चहल पहल शुरू हो जाने की उम्मीद जताई है।
दहशतगर्दों के सीनों में दहशत पैदा करके ही आतंकवादी वारदातों को रोका जा सकता है - मनीष सिंघल, सिंघल रोडवेज, कानपुर
दिल्ली देश के कारोबार का अड्डा है। दूसरे राज्यों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा - श्रीराम चौधरी, जगदम्बा ट्रेडर्स, पटना
संकट की इस घड़ी में व्यापारी समाज देश के साथ खड़ा है। आतंकवादियों का जल्द ही सफाया होगा - बनवारी लाल कंछल, उद्योग प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल
Tuesday, September 16, 2008
Friday, September 12, 2008
अब दिल्ली में भी कसी जाएगी प्रॉपर्टी डीलरों की नकेल
कुमार नरोत्तम / नई दिल्ली September 09, 2008
शहरी विकास मंत्रालय ने दिल्ली में प्रॉपर्टी सौदे को नियंत्रित करने के लिए प्रॉपर्टी डीलर और कंसल्टेंसी विधेयक का मसौदा लगभग तैयार कर लिया है।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बाबत नियमन का दस्तावेज लगभग तैयार है और जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। हालांकि दिल्ली में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाला है, इसलिए संभव है कि यह विधेयक अगली सरकार की निगरानी में पेश हो।
पूर्व शहरी विकास राज्य मंत्री अजय माकन ने 2006 में कहा था कि प्रॉपर्टी नियामक के लिए दिल्ली सरकार एक विधेयक लाएगी जो अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल होगा। लेकिन आलम यह है कि प्रॉपर्टी डीलरों को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली में इस तरह का कोई विधेयक अभी तक नही आ पाया है और पड़ोसी राज्य हरियाणा ने बाजी मार ली है।
हरियाणा विधानसभा ने पिछले मंगलवार को जब हरियाणा प्रॉपर्टी डीलर और कंसल्टेंट विधेयक 2008 पारित किया, तो दिल्ली के सरकारी महकमे में भी हलचल होने लगी। प्रॉपर्टी डीलर नियामक विधेयक न होने की वजह से लोगों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है। प्रॉपर्टी डीलर किसी भी प्रकार के सौदे का रिकॉर्ड नही रखते हैं।
जब भी कभी किसी प्रॉपर्टी को बेचने या खरीदने की बात डीलर के जरिये होती है, तो वे बतौर कमीशन बड़ी राशि ऐंठते हैं। ज्यादातर मामले में तो खरीदार और विक्रेता दोनों पक्षो से प्रॉपर्टी डीलर कमीशन लेते हैं। जब इस तरह के सौदे में किसी तरह का विवाद उत्पन्न होता है, तो ये प्रॉपर्टी डीलर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। इसके अलावा प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा जो कमीशन लिया जाता है, उसकी कोई नियत दर नही होती है।
रियल एस्टेट बाजार में मूल्यों को अपने हिसाब से नियंत्रित करने के लिए प्रॉपर्टी डीलर गलत तरीके का भी इस्तेमाल करते हैं। पहाड़गंज के शर्मा प्रॉपर्टी डीलर एडवाइजर एंड कॉन्ट्रैक्टर के मालिक मानस शर्मा ने बताया कि हमारे यहां हर प्रकार के सौदे के लिए नियत दरें उपलब्ध हैं।
अगर कोई खरीद बिक्री का सौदा 15 लाख से ज्यादा का होता है, तो हमलोग 1 फीसदी कमीशन लेते हैं और इससे कम की खरीद बिक्री पर 2 फीसदी कमीशन लेते हैं। मानस ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार के बिल आने से कोई परेशानी नही है। मुझे तो और खुशी होगी कि प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे में जो कुछ गलत लोग आ गए है, उन पर इससे लगाम लगाई जा सकेगी।
दरियागंज के सतीश प्रॉपर्टी के मालिक शशि टंडन ने कहा कानून के आने से कोई फर्क नही पड़ता है। अगर सरकार सच्चे मन से चाहती है कि प्रॉपर्टी के धंधे में गोरखधंधे को रोका जाए, तो उसे इन नियमों को सख्ती से क्रियान्वित करना चाहिए।
शहरी विकास मंत्रालय ने दिल्ली में प्रॉपर्टी सौदे को नियंत्रित करने के लिए प्रॉपर्टी डीलर और कंसल्टेंसी विधेयक का मसौदा लगभग तैयार कर लिया है।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बाबत नियमन का दस्तावेज लगभग तैयार है और जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। हालांकि दिल्ली में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाला है, इसलिए संभव है कि यह विधेयक अगली सरकार की निगरानी में पेश हो।
पूर्व शहरी विकास राज्य मंत्री अजय माकन ने 2006 में कहा था कि प्रॉपर्टी नियामक के लिए दिल्ली सरकार एक विधेयक लाएगी जो अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल होगा। लेकिन आलम यह है कि प्रॉपर्टी डीलरों को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली में इस तरह का कोई विधेयक अभी तक नही आ पाया है और पड़ोसी राज्य हरियाणा ने बाजी मार ली है।
हरियाणा विधानसभा ने पिछले मंगलवार को जब हरियाणा प्रॉपर्टी डीलर और कंसल्टेंट विधेयक 2008 पारित किया, तो दिल्ली के सरकारी महकमे में भी हलचल होने लगी। प्रॉपर्टी डीलर नियामक विधेयक न होने की वजह से लोगों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है। प्रॉपर्टी डीलर किसी भी प्रकार के सौदे का रिकॉर्ड नही रखते हैं।
जब भी कभी किसी प्रॉपर्टी को बेचने या खरीदने की बात डीलर के जरिये होती है, तो वे बतौर कमीशन बड़ी राशि ऐंठते हैं। ज्यादातर मामले में तो खरीदार और विक्रेता दोनों पक्षो से प्रॉपर्टी डीलर कमीशन लेते हैं। जब इस तरह के सौदे में किसी तरह का विवाद उत्पन्न होता है, तो ये प्रॉपर्टी डीलर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। इसके अलावा प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा जो कमीशन लिया जाता है, उसकी कोई नियत दर नही होती है।
रियल एस्टेट बाजार में मूल्यों को अपने हिसाब से नियंत्रित करने के लिए प्रॉपर्टी डीलर गलत तरीके का भी इस्तेमाल करते हैं। पहाड़गंज के शर्मा प्रॉपर्टी डीलर एडवाइजर एंड कॉन्ट्रैक्टर के मालिक मानस शर्मा ने बताया कि हमारे यहां हर प्रकार के सौदे के लिए नियत दरें उपलब्ध हैं।
अगर कोई खरीद बिक्री का सौदा 15 लाख से ज्यादा का होता है, तो हमलोग 1 फीसदी कमीशन लेते हैं और इससे कम की खरीद बिक्री पर 2 फीसदी कमीशन लेते हैं। मानस ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार के बिल आने से कोई परेशानी नही है। मुझे तो और खुशी होगी कि प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे में जो कुछ गलत लोग आ गए है, उन पर इससे लगाम लगाई जा सकेगी।
दरियागंज के सतीश प्रॉपर्टी के मालिक शशि टंडन ने कहा कानून के आने से कोई फर्क नही पड़ता है। अगर सरकार सच्चे मन से चाहती है कि प्रॉपर्टी के धंधे में गोरखधंधे को रोका जाए, तो उसे इन नियमों को सख्ती से क्रियान्वित करना चाहिए।
Thursday, September 4, 2008
राष्ट्रमंडल खेलों के बहाने संवरने लगा गुड़गांव
कुमार नरोत्तम / नई दिल्ली September 02, 2008
राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर दिल्ली के साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) को भी संवारने की तैयारी जोरों पर है। इस कड़ी में राजधानी से सटा गुड़गांव भी 2010 में नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी में जुट गया है।
इस बाबत हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) डेढ़ हजार करोड़ रुपये खर्च कर गुड़गांव के सौंदर्यीकरण की योजना बना रहा है। 2010 तक शहर में मेट्रो रेल रूट, न्यू पालम विहार खेड़कीदौला तक दूसरा एक्सप्रेस वे, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और कई विश्वस्तरीय होटल बनाए जाएंगे।
गुड़गांव में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कादरपुर स्थित प्रशिक्षण केंद्र में राष्ट्रमंडल खेलों की निशानेबाजी प्रतियोगिता आयोजित होगी। हुडा की प्रशासक जी अनुपमा ने टेलीफोन पर बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि राष्ट्रमंडल खेल तक गुड़गांव को पूरी तरह से सौंदर्यीकृत कर लिया जाएगा और इसे ब्रांड के तौर पर पेश किया जाएगा।
शहर में पार्क, सड़कें, सीवर, पानी, पार्किंग और होटल को सुव्यवस्थित तरीके से निर्मित किया जाएगा। शहर में मास रैपिड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी लागू किया जाएगा। इसके लिए सर्वेक्षण की प्रक्रिया भी शुरु हो गई है। शहर में फुट ओवर ब्रिज, फ्लाईओवर, एस्केलेटर फुट ओवर ब्रिज, गोल चक्कर , पार्क आदि के निर्माण स्थल के चयन के लिए विलबर्ड स्मिथ कंसल्टेंसी फर्म के जरिये सर्वेक्षण भी कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पार्कों को औद्योगिक इकाइयों के सहयोग से विकसित किया जाएगा। इसके लिए गुड़गांव के औद्योगिक संगठनों से बात भी चल रही है। दिल्ली से आवागमन संपर्क को बेहतर बनाने के लिए डेढ़ सौ मीटर चौड़ी सड़क के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
इन सारी परियोजनाओं के लिए हुडा को राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिसका वितरण सितंबर माह से शुरु हो जाएगा। राष्ट्रमंडल खेलों तक एक हजार क्यूसेक क्षमता की एनसीआर चैनल का काम भी पूरा कर लिया जाएगा। इस परियोजना के पूरा हो जाने के बाद गुड़गांव में पानी किल्लत की समस्या खत्म हो जाएगी। हरियाणा की कुल आमदनी का 40 प्रतिशत अकेले गुड़गांव से होता है।
राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर दिल्ली के साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) को भी संवारने की तैयारी जोरों पर है। इस कड़ी में राजधानी से सटा गुड़गांव भी 2010 में नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी में जुट गया है।
इस बाबत हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) डेढ़ हजार करोड़ रुपये खर्च कर गुड़गांव के सौंदर्यीकरण की योजना बना रहा है। 2010 तक शहर में मेट्रो रेल रूट, न्यू पालम विहार खेड़कीदौला तक दूसरा एक्सप्रेस वे, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और कई विश्वस्तरीय होटल बनाए जाएंगे।
गुड़गांव में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कादरपुर स्थित प्रशिक्षण केंद्र में राष्ट्रमंडल खेलों की निशानेबाजी प्रतियोगिता आयोजित होगी। हुडा की प्रशासक जी अनुपमा ने टेलीफोन पर बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि राष्ट्रमंडल खेल तक गुड़गांव को पूरी तरह से सौंदर्यीकृत कर लिया जाएगा और इसे ब्रांड के तौर पर पेश किया जाएगा।
शहर में पार्क, सड़कें, सीवर, पानी, पार्किंग और होटल को सुव्यवस्थित तरीके से निर्मित किया जाएगा। शहर में मास रैपिड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी लागू किया जाएगा। इसके लिए सर्वेक्षण की प्रक्रिया भी शुरु हो गई है। शहर में फुट ओवर ब्रिज, फ्लाईओवर, एस्केलेटर फुट ओवर ब्रिज, गोल चक्कर , पार्क आदि के निर्माण स्थल के चयन के लिए विलबर्ड स्मिथ कंसल्टेंसी फर्म के जरिये सर्वेक्षण भी कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पार्कों को औद्योगिक इकाइयों के सहयोग से विकसित किया जाएगा। इसके लिए गुड़गांव के औद्योगिक संगठनों से बात भी चल रही है। दिल्ली से आवागमन संपर्क को बेहतर बनाने के लिए डेढ़ सौ मीटर चौड़ी सड़क के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
इन सारी परियोजनाओं के लिए हुडा को राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिसका वितरण सितंबर माह से शुरु हो जाएगा। राष्ट्रमंडल खेलों तक एक हजार क्यूसेक क्षमता की एनसीआर चैनल का काम भी पूरा कर लिया जाएगा। इस परियोजना के पूरा हो जाने के बाद गुड़गांव में पानी किल्लत की समस्या खत्म हो जाएगी। हरियाणा की कुल आमदनी का 40 प्रतिशत अकेले गुड़गांव से होता है।
मौसम की बेरुखी से लुट गई खरीफ की बगिया
खरीफ फसल का अंकगणित - बिहार में 150 करोड़ रु. की फसल बर्बाद
कुमार नरोत्तम / नई दिल्ली September 03, 2008
बिहार में आई विनाशकारी बाढ़ की वजह से 1.25 हेक्टेयर में फैली 150 करोड़ रुपये की फसल बर्बाद हुई है। राज्य कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह आंकड़ा आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि धान और मक्का की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई है। इसके अलावा दलहन, केला और सब्जियों की बागवानी भी बर्बाद हुए हैं। बर्बादी का आकलन फसल के क्षेत्रफल और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में औसत उपज के आधार पर किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बाढ़ के बाद खेतों में नमकीन रेत रह जाती है, तो इससे रबी फसल भी प्रभावित हो सकती है। उल्लेखनीय है कि राज्य की मुख्य खरीफ फसलों में चावल और मक्का है जिसकी बुआई जून-जुलाई में शुरू हो जाती है। मगर इस साल सुपौल, सहरसा, अररिया और मधेपुरा में आई बाढ़ से ये फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं।
विश्लेषक मानते हैं कि बिहार के दूसरे इलाके में इसके रकबे को बढ़ाकर इस नुकसान को कमोबेश कम किया जा सकता है। पिछले साल देश में 8 करोड़ 30 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ था, जो उससे पिछले साल के 8 करोड़ टन से थोडा ज्यादा था।
मोटे तौर पर भारत में इस साल जून तक 9 करोड़ 30 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ है। मगर इस साल बाढ़ की वजह से खरीफ की बुआई में 2 से 3 प्रतिशत की कमी देखी जा सकती है। देश में मक्के का उत्पादन 67 लाख हेक्टेयर में होने का अनुमान है।
कुमार नरोत्तम / नई दिल्ली September 03, 2008
बिहार में आई विनाशकारी बाढ़ की वजह से 1.25 हेक्टेयर में फैली 150 करोड़ रुपये की फसल बर्बाद हुई है। राज्य कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह आंकड़ा आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि धान और मक्का की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई है। इसके अलावा दलहन, केला और सब्जियों की बागवानी भी बर्बाद हुए हैं। बर्बादी का आकलन फसल के क्षेत्रफल और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में औसत उपज के आधार पर किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बाढ़ के बाद खेतों में नमकीन रेत रह जाती है, तो इससे रबी फसल भी प्रभावित हो सकती है। उल्लेखनीय है कि राज्य की मुख्य खरीफ फसलों में चावल और मक्का है जिसकी बुआई जून-जुलाई में शुरू हो जाती है। मगर इस साल सुपौल, सहरसा, अररिया और मधेपुरा में आई बाढ़ से ये फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं।
विश्लेषक मानते हैं कि बिहार के दूसरे इलाके में इसके रकबे को बढ़ाकर इस नुकसान को कमोबेश कम किया जा सकता है। पिछले साल देश में 8 करोड़ 30 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ था, जो उससे पिछले साल के 8 करोड़ टन से थोडा ज्यादा था।
मोटे तौर पर भारत में इस साल जून तक 9 करोड़ 30 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ है। मगर इस साल बाढ़ की वजह से खरीफ की बुआई में 2 से 3 प्रतिशत की कमी देखी जा सकती है। देश में मक्के का उत्पादन 67 लाख हेक्टेयर में होने का अनुमान है।
मदद की तलाश छोड़ बने मददगार
कुमार नरोत्तम / नई दिल्ली August 31, 2008
बिहार में बाढ़ पीड़ित क्षेत्र के आम लोग अब राहत कार्य में मदद करने के लिए आगे बढ़ कर आए हैं।
बाढ़ पीड़ित क्षेत्र के ऐसे इलाके, जहां पानी नहीं घुसा है, वहां के हर घर से पांच रोटी और सब्जी एकत्रित की जा रही है। उसके बाद ये लोग पेड़ों पर कैंप लगाकर बाढ़ में फंसे लोगों को पुकार-पुकार कर खाना भेजने का प्रबंध कर रहे हैं।
खाने के साथ-साथ पीने के पानी की भी व्यवस्था की जा रही है। सहरसा के नजदीक डिस्टीलेशन केंद्र पर पानी को पैक कर सील करवाया जा रहा है और बाढ़ पीड़ितों को पानी मुफ्त में भेजा जा रहा है। सहरसा जिले के निवासी संजय कुमार ने बताया कि बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों के रेलवे स्टेशनों से गुजरने वाली ट्रेनों को रोककर हर बोगी में जा-जाकर बाढ़ पीड़ितों को खाना और पानी पहुंचाया जा रहा है।
बिहार में बाढ़ पीड़ित क्षेत्र के आम लोग अब राहत कार्य में मदद करने के लिए आगे बढ़ कर आए हैं।
बाढ़ पीड़ित क्षेत्र के ऐसे इलाके, जहां पानी नहीं घुसा है, वहां के हर घर से पांच रोटी और सब्जी एकत्रित की जा रही है। उसके बाद ये लोग पेड़ों पर कैंप लगाकर बाढ़ में फंसे लोगों को पुकार-पुकार कर खाना भेजने का प्रबंध कर रहे हैं।
खाने के साथ-साथ पीने के पानी की भी व्यवस्था की जा रही है। सहरसा के नजदीक डिस्टीलेशन केंद्र पर पानी को पैक कर सील करवाया जा रहा है और बाढ़ पीड़ितों को पानी मुफ्त में भेजा जा रहा है। सहरसा जिले के निवासी संजय कुमार ने बताया कि बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों के रेलवे स्टेशनों से गुजरने वाली ट्रेनों को रोककर हर बोगी में जा-जाकर बाढ़ पीड़ितों को खाना और पानी पहुंचाया जा रहा है।
छोटा पत्रकार बड़ा पत्रकार
समाज के इन दो वर्गों को कवर करते हुए पत्रकार भी दो श्रेणियों में बंटे हुए हैं. एक है छोटा पत्रकार. बेचारा. चेहरे पर दीन-हीन भाव, पिचके गाल और पेट, कभी कुर्ता तो कभी कंधे पर बैग लटकाए. दुम हिलाते आगे-पीछे घूमते हुए.
एक है बड़ा पत्रकार. चेहरे पर कुलीनता. मोटी तनख्वाहों से पेट और गाल फूलते हुए. कभी कुर्ता पहने तो चंपू बोले वाह सर क्या फैशन है. चार पांच चंपू आगे-पीछे घूमते हुए.
ख़बर भी इन दोनों के अंतर को समझती है. इसलिए छोटा पत्रकार ख़बर के पीछे भागता है. ख़बर बड़े पत्रकार के पीछे भागती है.
बड़ा पत्रकार ख़बर बनाता भी है. छोटा पत्रकार बड़े पत्रकार पर ख़बर लिखकर खुद को धन्य महसूस करता है. बड़े पत्रकार का पार्टियों में जाना, मैय्यत में जाना, नए ढंग से बाल कटवाना सब ख़बर है.
बड़ा पत्रकार पैदा होता है. छोटा पत्रकार छोटी जगह से आकर बड़ा बनने की कोशिश करता है.
बड़े पत्रकार के मुंह में चांदी की चम्मच होती है. वो बड़े स्कूलों में पढ़ने जाता है. शुरू से उसकी ज़बान अंग्रेजी बोलती है. हिंदी में वो सिर्फ़ अपनी कामवाली बाइयों और ड्राइवर से ही बात कर पाता है.
छोटा पत्रकार टाटपट्टियों पर बैठकर पढ़ाई करता है. मास्टरजी की बेंत उसके हाथों को लाल करती है. बारहवीं कक्षा तक फ़ादअ को फ़ादर और विंड को वाइंड कहता है. गुड मॉर्निंग कहने में ही उसके चेहरा शर्म से लाल हो जाता है.
नौकरियां छोटे पत्रकार को दुत्कारती हैं. बड़े पत्रकार को बुलाती हैं. नेता भी बड़े पत्रकार को पूछते हैं. छोटे से पूछते हैं तेरी औकात क्या है.
लेकिन छोटा कभी कभी बड़े काम करने की कोशिश भी करता है. कभी-कभी कर भी जाता है. लेकिन जब बड़ी ख़बर लेकर बड़े पत्रकार के पास जाता है तो बड़े पत्रकार को उसके इरादों पर शक होने लगता है.
कही ये अपनी औकात से बाहर तो नहीं निकल रहा. कहीं ये मेरी जगह लेने की कोशिश तो नहीं कर रहा. अबे ओ हरामी छोटे पत्रकार. अपनी औकात में रह. ये ख़बर अख़बार में नहीं जाएगी.
बड़ा पत्रकार कई बार छोटे को ख़बर का मतलब भी समझाने लगता है. देख छोटे. आज कल न ये समाजसेवी ख़बरों का ज़माना नहीं रहा. भ्रष्टाचार का खुलासा करेगा. अरे वो तो हर जगह है. आज के ज़माने में नई तरह की ख़बरें चलती हैं.
देख छोटे. टीवी चैनल्स को देख. वहां क्या नहीं बिक रहा है. खली चल रहा है. राखी सावंत के लटके-झटके चल रहे हैं. तू इन सबके बीच ये ख़बर कहां से ले आया रे.
लेकिन हुजूर हमें तो यही सिखाया गया. अबे चुप ईडियट. क्या पोंगा पंडितों की बात करता है. देख तेरी इच्छा यही है न कि तू भी बड़ा पत्रकार बने. बड़ी गाड़ी में घूमे. मोटी तनख्वाह पाए. इसलिए जो तूझे सिखाया गया उसको भूल जा. अब जैसा मैं करता हूं वैसा कर तो बड़ा पत्रकार बन जाएगा.
अबे तेरी औकात क्या है छोटे. कहता है बीस साल हो गए पत्रकारिता में. क्या मिला. अरे मिलेगा क्या. बाबाजी का घंटा. हमें देख. दस साल में कहां से कहां पहुंच गए.
छोटा और छोटा हो जाता है. लटका चेहरा लटक कर पैर तक पहुंचता है. घर पहुंचता है तो बीवी की मुस्कान उसे चुड़ैल के अट्टहास की तरह लगती है. कल तक जिस बेटे को सिर आँखों पर रखा उसे लात मार कर बोलता है अबे ओ छोटे की औलाद. तू ज़िंदगी भर छोटे की औलाद ही रहेगा.
Posted by akhilesh sharma
एक है बड़ा पत्रकार. चेहरे पर कुलीनता. मोटी तनख्वाहों से पेट और गाल फूलते हुए. कभी कुर्ता पहने तो चंपू बोले वाह सर क्या फैशन है. चार पांच चंपू आगे-पीछे घूमते हुए.
ख़बर भी इन दोनों के अंतर को समझती है. इसलिए छोटा पत्रकार ख़बर के पीछे भागता है. ख़बर बड़े पत्रकार के पीछे भागती है.
बड़ा पत्रकार ख़बर बनाता भी है. छोटा पत्रकार बड़े पत्रकार पर ख़बर लिखकर खुद को धन्य महसूस करता है. बड़े पत्रकार का पार्टियों में जाना, मैय्यत में जाना, नए ढंग से बाल कटवाना सब ख़बर है.
बड़ा पत्रकार पैदा होता है. छोटा पत्रकार छोटी जगह से आकर बड़ा बनने की कोशिश करता है.
बड़े पत्रकार के मुंह में चांदी की चम्मच होती है. वो बड़े स्कूलों में पढ़ने जाता है. शुरू से उसकी ज़बान अंग्रेजी बोलती है. हिंदी में वो सिर्फ़ अपनी कामवाली बाइयों और ड्राइवर से ही बात कर पाता है.
छोटा पत्रकार टाटपट्टियों पर बैठकर पढ़ाई करता है. मास्टरजी की बेंत उसके हाथों को लाल करती है. बारहवीं कक्षा तक फ़ादअ को फ़ादर और विंड को वाइंड कहता है. गुड मॉर्निंग कहने में ही उसके चेहरा शर्म से लाल हो जाता है.
नौकरियां छोटे पत्रकार को दुत्कारती हैं. बड़े पत्रकार को बुलाती हैं. नेता भी बड़े पत्रकार को पूछते हैं. छोटे से पूछते हैं तेरी औकात क्या है.
लेकिन छोटा कभी कभी बड़े काम करने की कोशिश भी करता है. कभी-कभी कर भी जाता है. लेकिन जब बड़ी ख़बर लेकर बड़े पत्रकार के पास जाता है तो बड़े पत्रकार को उसके इरादों पर शक होने लगता है.
कही ये अपनी औकात से बाहर तो नहीं निकल रहा. कहीं ये मेरी जगह लेने की कोशिश तो नहीं कर रहा. अबे ओ हरामी छोटे पत्रकार. अपनी औकात में रह. ये ख़बर अख़बार में नहीं जाएगी.
बड़ा पत्रकार कई बार छोटे को ख़बर का मतलब भी समझाने लगता है. देख छोटे. आज कल न ये समाजसेवी ख़बरों का ज़माना नहीं रहा. भ्रष्टाचार का खुलासा करेगा. अरे वो तो हर जगह है. आज के ज़माने में नई तरह की ख़बरें चलती हैं.
देख छोटे. टीवी चैनल्स को देख. वहां क्या नहीं बिक रहा है. खली चल रहा है. राखी सावंत के लटके-झटके चल रहे हैं. तू इन सबके बीच ये ख़बर कहां से ले आया रे.
लेकिन हुजूर हमें तो यही सिखाया गया. अबे चुप ईडियट. क्या पोंगा पंडितों की बात करता है. देख तेरी इच्छा यही है न कि तू भी बड़ा पत्रकार बने. बड़ी गाड़ी में घूमे. मोटी तनख्वाह पाए. इसलिए जो तूझे सिखाया गया उसको भूल जा. अब जैसा मैं करता हूं वैसा कर तो बड़ा पत्रकार बन जाएगा.
अबे तेरी औकात क्या है छोटे. कहता है बीस साल हो गए पत्रकारिता में. क्या मिला. अरे मिलेगा क्या. बाबाजी का घंटा. हमें देख. दस साल में कहां से कहां पहुंच गए.
छोटा और छोटा हो जाता है. लटका चेहरा लटक कर पैर तक पहुंचता है. घर पहुंचता है तो बीवी की मुस्कान उसे चुड़ैल के अट्टहास की तरह लगती है. कल तक जिस बेटे को सिर आँखों पर रखा उसे लात मार कर बोलता है अबे ओ छोटे की औलाद. तू ज़िंदगी भर छोटे की औलाद ही रहेगा.
Posted by akhilesh sharma
मायावती की तो जान ही ले लेते!
» रात्रि उड़ान के लिए प्रतिबंधित हेलीकॉप्टर उड़ा रहे थे कैबिनेट सेक्रेटरी
» प्रदेश के उड्डयन महकमे में भीषण भ्रष्टाचार, खतरे में वीवीआईपी उड़ानें
» बिना किसी ट्रेनिंग के उड़ा रहे हैं अमेरिकी विमान और हेलीकॉप्टर
एक सितम्बर की रात प्रदेश में एक बड़ा हादसा हो सकता था। जो नौकरशाह मुख्यमंत्री की हिफाजत के प्रति आधिकारिक तौर पर जवाबदेह हैं वे अपनी गैरजिम्मेदाराना हरकतों से उस दिन मुख्यमंत्री मायावती की जान ही ले लेते। वीवीआईपी उड़ान की उच्च संवेदनशीलता के बावजूद उस दिन जिस स्तर की खतरनाक तकनीकी चूक की गई, वह उड्डयन इतिहास का नायाब पन्ना है। जिस सिंगल इंजिन हेलीकॉप्टर पर मुख्यमंत्री मायावती को बैठा कर रात में संत कबीर नगर और फैजाबाद ले जाया गया, उस हेलीकॉप्टर के लिए रात की फ्लाइंग कानूनन प्रतिबंधित है। उसमें रात्रि उड़ान के उपकरण हैं ही नहीं। रात में जब मुख्यमंत्री को लेकर वही हेलीकॉप्टर संत कबीर नगर से उड़ा तो टेक-ऑफ के लिए कारों की बत्तियां जलानी पड़ीं। फिर फैजाबाद में नाइट लैंडिंग का खतरनाक जोखिम उठाया गया। उसके बाद लखनऊ से गए विमान से मायावती वापस लौटीं। बात यहां खत्म नहीं होती। बात यहीं से शुरू होती है। वीवीआईपी उड़ान को लेकर यह जो गैरजिम्मेदाराना कृत्य हुआ वह उत्तर प्रदेश के कैबिनेट सेक्रेटरी शशांक शेखर सिंह ने किया। सिंगल इंजिन वाला जर्जर हेलीकॉप्टर खुद शशांक और विंग कमांडर आरएन सेनगुप्ता उड़ा रहे थे। शशांक प्रदेश सरकार के उड्डयन सलाहकार भी हैं और पाइलट भी। प्रतिबंधित हेलीकॉप्टर को रात में उड़ाने का मसला नागरिक उड्डयन महानिदेशालय [डीजीसीए] तक तूल न पकड़े इसके लिए उड़ान दस्तावेजों में समय को लेकर फर्जी तथ्य भी दर्ज किए गए।
फैजाबाद में एयरपोर्ट अथॉरिटी का कोई एयर ट्रैफिक कंट्रोल नहीं है, लिहाजा हेलीकॉप्टर की लैंडिंग का समय अपनी मर्जी से शाम करीब सवा छह बजे और हवाई जहाज के टेक-ऑफ का समय करीब साढ़े छह बजे दर्ज कर दिया गया। लेकिन लखनऊ के एयर ट्रैफिक कंट्रोल में मायावती को लेकर आए विमान [सुपर किंग एयर] के लखनऊ पहुंचने का समय आधिकारिक तौर पर रात का सवा आठ [8.15] दर्ज है। अगर हवाई जहाज ने साढ़े छह बजे शाम फैजाबाद से लखनऊ के लिए उड़ान भरी तो उसे लखनऊ पहुंचने में सवा दो घंटे क्यों लगे? मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर उड्डयन महकमे की लापरवाही का आलम यह है कि उन्हें 'रेस्क्यु’ कर लाने के लिए भेजे गए विमान को भी अयोग्य घोषित पाइलट ही उड़ा रहे थे। इनमें से एक वयोवृद्ध कैप्टन पीसीएफ डिसूजा मेडिकली अनफिट हैं तो दूसरे कैप्टन वीवी सिंह भी करीब 62 साल के हैं जो उड़ान अर्हता पास नहीं हैं।
अमेरिका से बड़े नाज नखरे से जो विमान [वीटीयूपीएन] और हेलीकॉप्टर [वीटीयूपीओ] लखनऊ लाया गया था, उससे जुड़े तथ्य भी कम रोचक-रोमांचक नहीं हैं। विमान पूर्ण रूप से जेट विमान है। इसे उड़ाने की योग्यता उत्तर प्रदेश में किसी के पास नहीं है। लेकिन उक्त विमान और हेलीकॉप्टर दोनों से ही वीवीआईपी सवारियां लेकर उड़ान भरने का भारी रिस्क लगातार उठाया जा रहा है। अभी एक सितम्बर को उसी अमेरिकी हेलीकॉप्टर पर मुख्यमंत्री को बिठा कर उड़ान भरने की कोशिश की गई, लेकिन वह हवा में धचके खाने लगा। किसी तरह हेलीकॉप्टर उतारा गया।
जेट विमान को उड़ाने की ट्रेनिंग के लिए योग्य पाइलटों को न भेज कर कैप्टन वीवी सिंह [62] और वायुसेना से डेपुटेशन पर आए विंग कमांडर राजेश कुमार नागर को अमेरिका भेजा गया। लेकिन कैप्टन वीवी सिंह उड़ान प्रशिक्षण पास नहीं कर पाए। ...और नागर वही हैं जो अभी हाल ही इलाहाबाद में राज्य सरकार का विमान दुर्घटनाग्रस्त कर चुके हैं। हैरत यह है कि अपने प्रदेश के कैबिनेट सेक्रेटरी शशांक शेखर सिंह अमेरिका से आया विमान और हेलीकॉप्टर दोनों ही उड़ा रहे हैं। शशांक जेट विमान की ट्रेनिंग लेने अमेरिका गए भी नहीं और डीजीसीए से 'इंडोर्समेंट’ भी पा लिया!
जिस दिन दिल्ली में विश्वास मत पर संसद में वोट पड़ने वाला था, उस दिन मुख्यमंत्री मायावती की सुरक्षा के साथ विश्वासघात की वजह तैयार हो रही थी। उन्हें उसी जेट विमान से शशांक दिल्ली लेकर गए। शशांक उस विमान को 'सिंगल क्वालिफायड पाइलट’ के बतौर अकेले ही उड़ा रहे थे। डीजीसीए का उड़ान नियम यह कहता है कि पाइलट को सम्बद्ध विमान उड़ाने का कम से कम 50 घंटे का अनुभव बतौर पाइलट इन कमांड [पीआईसी] होना चाहिए। इसके अलावा 50 घंटे की नाइट फ्लाइंग का अनुभव भी अनिवार्य है।
अभी 13/14 अगस्त को कैबिनेट सेक्रेटरी इसी जेट विमान को अकेले उड़ा कर दिल्ली गए। शशांक अपना रूटीन पाइलट मेडिकल जांच कराने गए थे। शाम को 7.17 पर विमान लेकर पालम से उड़े। लेकिन उड़ते ही एटीसी से वापस इमरजेंसी लैंडिंग की इजाजत मांगने लगे। 7.34 में पालम पर ही वापस लैंड किया। पाया गया कि गलत हैंडलिंग के कारण विमान में 'ट्रिम फेल्योर’ हो गया जिस वजह से विमान का नियंत्रण खो चुका था। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इस खराबी के बारे में डीजीसीए को फौरन ही इत्तिला कर दी। लेकिन विमान में खराबी क्यों आई? प्रदेश की मुख्यमंत्री को इन तथ्यों की जानकारी नहीं दी जाती। लखनऊ में बसपाई रैली के दिन उसी अमेरिकी हेलीकॉप्टर से शशांक शेखर उन्हें रैली स्थल तक ले गए थे, जिस दिन मायावती ने मंच से कहा था, 'मेरी जान को खतरा है...’
प्रभात रंजन दीन
» प्रदेश के उड्डयन महकमे में भीषण भ्रष्टाचार, खतरे में वीवीआईपी उड़ानें
» बिना किसी ट्रेनिंग के उड़ा रहे हैं अमेरिकी विमान और हेलीकॉप्टर
एक सितम्बर की रात प्रदेश में एक बड़ा हादसा हो सकता था। जो नौकरशाह मुख्यमंत्री की हिफाजत के प्रति आधिकारिक तौर पर जवाबदेह हैं वे अपनी गैरजिम्मेदाराना हरकतों से उस दिन मुख्यमंत्री मायावती की जान ही ले लेते। वीवीआईपी उड़ान की उच्च संवेदनशीलता के बावजूद उस दिन जिस स्तर की खतरनाक तकनीकी चूक की गई, वह उड्डयन इतिहास का नायाब पन्ना है। जिस सिंगल इंजिन हेलीकॉप्टर पर मुख्यमंत्री मायावती को बैठा कर रात में संत कबीर नगर और फैजाबाद ले जाया गया, उस हेलीकॉप्टर के लिए रात की फ्लाइंग कानूनन प्रतिबंधित है। उसमें रात्रि उड़ान के उपकरण हैं ही नहीं। रात में जब मुख्यमंत्री को लेकर वही हेलीकॉप्टर संत कबीर नगर से उड़ा तो टेक-ऑफ के लिए कारों की बत्तियां जलानी पड़ीं। फिर फैजाबाद में नाइट लैंडिंग का खतरनाक जोखिम उठाया गया। उसके बाद लखनऊ से गए विमान से मायावती वापस लौटीं। बात यहां खत्म नहीं होती। बात यहीं से शुरू होती है। वीवीआईपी उड़ान को लेकर यह जो गैरजिम्मेदाराना कृत्य हुआ वह उत्तर प्रदेश के कैबिनेट सेक्रेटरी शशांक शेखर सिंह ने किया। सिंगल इंजिन वाला जर्जर हेलीकॉप्टर खुद शशांक और विंग कमांडर आरएन सेनगुप्ता उड़ा रहे थे। शशांक प्रदेश सरकार के उड्डयन सलाहकार भी हैं और पाइलट भी। प्रतिबंधित हेलीकॉप्टर को रात में उड़ाने का मसला नागरिक उड्डयन महानिदेशालय [डीजीसीए] तक तूल न पकड़े इसके लिए उड़ान दस्तावेजों में समय को लेकर फर्जी तथ्य भी दर्ज किए गए।
फैजाबाद में एयरपोर्ट अथॉरिटी का कोई एयर ट्रैफिक कंट्रोल नहीं है, लिहाजा हेलीकॉप्टर की लैंडिंग का समय अपनी मर्जी से शाम करीब सवा छह बजे और हवाई जहाज के टेक-ऑफ का समय करीब साढ़े छह बजे दर्ज कर दिया गया। लेकिन लखनऊ के एयर ट्रैफिक कंट्रोल में मायावती को लेकर आए विमान [सुपर किंग एयर] के लखनऊ पहुंचने का समय आधिकारिक तौर पर रात का सवा आठ [8.15] दर्ज है। अगर हवाई जहाज ने साढ़े छह बजे शाम फैजाबाद से लखनऊ के लिए उड़ान भरी तो उसे लखनऊ पहुंचने में सवा दो घंटे क्यों लगे? मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर उड्डयन महकमे की लापरवाही का आलम यह है कि उन्हें 'रेस्क्यु’ कर लाने के लिए भेजे गए विमान को भी अयोग्य घोषित पाइलट ही उड़ा रहे थे। इनमें से एक वयोवृद्ध कैप्टन पीसीएफ डिसूजा मेडिकली अनफिट हैं तो दूसरे कैप्टन वीवी सिंह भी करीब 62 साल के हैं जो उड़ान अर्हता पास नहीं हैं।
अमेरिका से बड़े नाज नखरे से जो विमान [वीटीयूपीएन] और हेलीकॉप्टर [वीटीयूपीओ] लखनऊ लाया गया था, उससे जुड़े तथ्य भी कम रोचक-रोमांचक नहीं हैं। विमान पूर्ण रूप से जेट विमान है। इसे उड़ाने की योग्यता उत्तर प्रदेश में किसी के पास नहीं है। लेकिन उक्त विमान और हेलीकॉप्टर दोनों से ही वीवीआईपी सवारियां लेकर उड़ान भरने का भारी रिस्क लगातार उठाया जा रहा है। अभी एक सितम्बर को उसी अमेरिकी हेलीकॉप्टर पर मुख्यमंत्री को बिठा कर उड़ान भरने की कोशिश की गई, लेकिन वह हवा में धचके खाने लगा। किसी तरह हेलीकॉप्टर उतारा गया।
जेट विमान को उड़ाने की ट्रेनिंग के लिए योग्य पाइलटों को न भेज कर कैप्टन वीवी सिंह [62] और वायुसेना से डेपुटेशन पर आए विंग कमांडर राजेश कुमार नागर को अमेरिका भेजा गया। लेकिन कैप्टन वीवी सिंह उड़ान प्रशिक्षण पास नहीं कर पाए। ...और नागर वही हैं जो अभी हाल ही इलाहाबाद में राज्य सरकार का विमान दुर्घटनाग्रस्त कर चुके हैं। हैरत यह है कि अपने प्रदेश के कैबिनेट सेक्रेटरी शशांक शेखर सिंह अमेरिका से आया विमान और हेलीकॉप्टर दोनों ही उड़ा रहे हैं। शशांक जेट विमान की ट्रेनिंग लेने अमेरिका गए भी नहीं और डीजीसीए से 'इंडोर्समेंट’ भी पा लिया!
जिस दिन दिल्ली में विश्वास मत पर संसद में वोट पड़ने वाला था, उस दिन मुख्यमंत्री मायावती की सुरक्षा के साथ विश्वासघात की वजह तैयार हो रही थी। उन्हें उसी जेट विमान से शशांक दिल्ली लेकर गए। शशांक उस विमान को 'सिंगल क्वालिफायड पाइलट’ के बतौर अकेले ही उड़ा रहे थे। डीजीसीए का उड़ान नियम यह कहता है कि पाइलट को सम्बद्ध विमान उड़ाने का कम से कम 50 घंटे का अनुभव बतौर पाइलट इन कमांड [पीआईसी] होना चाहिए। इसके अलावा 50 घंटे की नाइट फ्लाइंग का अनुभव भी अनिवार्य है।
अभी 13/14 अगस्त को कैबिनेट सेक्रेटरी इसी जेट विमान को अकेले उड़ा कर दिल्ली गए। शशांक अपना रूटीन पाइलट मेडिकल जांच कराने गए थे। शाम को 7.17 पर विमान लेकर पालम से उड़े। लेकिन उड़ते ही एटीसी से वापस इमरजेंसी लैंडिंग की इजाजत मांगने लगे। 7.34 में पालम पर ही वापस लैंड किया। पाया गया कि गलत हैंडलिंग के कारण विमान में 'ट्रिम फेल्योर’ हो गया जिस वजह से विमान का नियंत्रण खो चुका था। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इस खराबी के बारे में डीजीसीए को फौरन ही इत्तिला कर दी। लेकिन विमान में खराबी क्यों आई? प्रदेश की मुख्यमंत्री को इन तथ्यों की जानकारी नहीं दी जाती। लखनऊ में बसपाई रैली के दिन उसी अमेरिकी हेलीकॉप्टर से शशांक शेखर उन्हें रैली स्थल तक ले गए थे, जिस दिन मायावती ने मंच से कहा था, 'मेरी जान को खतरा है...’
प्रभात रंजन दीन
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